Agra: दबंग पड़ोसियों से परेशान होकर युवती ने की आत्महत्या

छात्रा के परिजनों का कहना था कि यदि पुलिस समय से कार्रवाई करती तो बेटी की जान नहीं जाती।

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Agra

आगरा में पड़ोसी की दबंगई से परेशान एक लड़की ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। चचेरी बहन ने बताया कि पड़ोसी के खिलाफ पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा मेरी बहन को बुलाकर पुलिस स्टेशन में घंटों इंतजार करने के लिए मजबूर किया गया। इस वजह से आरोपियों के हौंसले बुलंद हो गए थे। बहन हमेशा डरी सहमी रहती थी। हम दोनों ने खुद को घर में कैद कर लिया था।

क्या है मामला

थाना जगदीशपुरा की अवधपुरी कालोनी निवासी 12 वीं की छात्रा ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि छेड़छाड़ के मुकदमें में साढ़े चार महीने बाद भी कोई कार्रवाई न होने से युवती आहत थी। उल्टा पुलिस युवती को बुलाकर बयान दर्ज कराने के नाम पर घंटों थाने में बैठाए रखती थी। युवती की तयेरी बहन ने बताया कि एक जनवरी को वो बाजार जा रही थीं। रास्ते में उन्हें और चचेरी बहन को दो युवकों ने रोक लिया था। एक हेलमेट और मास्क पहने था। दूसरे ने चेहरे पर साफी बांध रखी थी। एक युवक मेरा हाथ पकड़कर खींच रहा था। बहन ने विरोध किया। शोर मचाने पर राहगीर आ गए। उन्होंने बचाया। पुलिस से शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

तीन साल पुराना है विवाद

मृतका के ताऊ का आरोप है कि तीन साल से विवाद है। पड़ोसी ने पहले उनके गेट की तरफ अपना गेट खोला। फिर टिनशेड डालकर कार खड़ी करने लगा। विरोध पर दबंगों को बैठाने लगा। पार्क में भी पौधे लगाकर दीवार कर ली। दो साल पहले नगर निगम ने अतिक्रमण हटाया तो पड़ोसी रंजिश मानने लगा। विवेचक ने कोई कार्रवाई नहीं की। कुछ नहीं होगा। इससे पड़ोसी के हौसले बुलंद थे।

दर्ज हुआ था मुकदमा

बताया गया कि छेड़छाड़ के बाद जब परिजन थाने रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे तो पुलिस ने उनकी शिकायत पर ध्यान ही नहीं दिया। राज्य महिला आयोग में प्रार्थनापत्र देने पर मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक को 7-8 बार चौकी पर बुलाया। तीन बार थाने भी गए। हर बार पुलिस घंटों बैठाने के बाद घर भेज देती थी। एक बार एसीपी से भी मिले। वो घर आए। जांच करके चले गए। मगर, कार्रवाई नहीं हुई। इससे दोनों काफी डर गई थीं। पड़ोसी परिवार घर के बाहर दबंगों को बैठाता था। डर से वो घर में कैद हो गई थीं। बाद में इसी डर में बहन ने डर से आत्महत्या कर ली। मौत के बाद पुलिस कार्रवाई कर रही है। आरोपियों को कड़ी सजा मिले। नामजद आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाए। उधर, मृतक युवती की बड़ी बहन की तबीयत खराब होने से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पहले होती कार्रवाई तो नहीं जाती जान

परिजन का आरोप है कि चौकी प्रभारी ने साढ़े चार महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़िता के बयान तक दर्ज नहीं किए। एसीपी और थाना प्रभारी ने भी ध्यान नहीं दिया। वरिष्ठ अधिकारियों को भी रिपोर्ट नहीं दी गई। आरोपियों की पहचान तक नहीं की गई। इससे पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि अगर, पुलिस पहले दिन ही सुन लेती तो बहन को जान नहीं गंवानी पड़ती।

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