जाने देवो के देव महादेव को समर्पित प्रदोष व्रत से जुडी व्रत कथा

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प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो देवो के देव महादेव को समर्पित होता है। व्रत के दिन ज्योतिष व्रत कर शाम के समय भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है और फिर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस माह का प्रदोष व्रत 7 फरवरी 2024 को पड़ रहा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करते समय व्रत कथा अवश्य पढ़ें क्योंकि बिना व्रत कथा के कोई भी व्रत पूरा नहीं माना जाता है।

भौम प्रदोष व्रत कथा

हिंदू धर्म शास्त्रों में प्रत्येक व्रत के पीछे की महिमा और महत्व के बारे में कथा के माध्यम से जानकारी दी गई है। ऐसे में भौम प्रदोष व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा काफी प्रचलित है। इसके अनुसार एक गांव में एक विधवा ब्राह्मणी रहती थी, जो भिक्षा मांगकर अपना पालन-पोषण करती थी। रोज की तरह ही एक दिन जब वह भिक्षा मांग कर घर वापस लौट रही थी, तो रास्ते में उसे दो बच्चे मिले। जो अकेले और बेसहरा थे। उन्हें इसी तरह देखकर ब्राह्मणी अपने घर ले आई और उनका पालन-पोषण करने लगी।

जब वे दोनों बालक बड़े हो गये तो ब्राह्मणी उन्हें लेकर ऋषि शांडिल्य के आश्रम में चले गये।जहां ऋषि शांडिल्य ने अपने तपोबल से बालकों के बारे में बताया था- हे देवी! ये दोनों कोई सामान्य बालिग नहीं हैं, बल्कि विदर्भ राज्य के राजकुमार हैं। गंदर्भ नरेश के आक्रमण से उनके पिता का राजपाठ छिन गया। ऐसे में ब्राह्मणी ने ऋषि से आग्रह किया कि कोई ऐसा उपाय हो जिससे दोनों बच्चों को अपना परिवार व राज्य वापस मिल जाए। ऋषि शांडिल्य ने कहा कि आपको त्रिविधि-विधान से प्रदोष व्रत करों का संकल्प अवश्य लेना चाहिए।

ब्राह्मणी और राजकुमारों ने विधि-विधान से प्रदोष व्रत रखा। फिर एक दिन बड़े राजकुमार की मुलाकात अंशुमती से हुई, दोनों एक-दूसरे को साझा करने लगे। तब अंशुमती के पिता ने राजकुमार की सहमति से दोनों की शादी करा दी। इसके बाद दोनों राजकुमारों अंशुमती के पिता की मदद से गंदर्भ पर हमला हुआ और उनकी जीत हुई। जिसके बाद दोनों राजकुमारों को अपना सिंहासन वापस मिल गया और गरीब ब्राह्मणी को भी एक खास जगह दे दी गई, जिससे उनका सारा दुख समाप्त हो गया। राज-पाठ वापस मिलने का कारण प्रदोष व्रत था, जिससे उन्हें संपत्ति मिल गई और जीवन में खुशहाली आई।

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