हरदोई: मासूम के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए मां परिवार के साथ बैठीं धरने पर

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Hardoi

Uttar Pradesh: हरदोई (Hardoi) जनपद की बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभा काकूपुर में एक मासूम को हत्यारों ने मौत के घाट उतार दिया। मौत के घाट उतारने वाले हत्यारों के खिलाफ पीड़िता कई दिनों से न्याय की गुहार लगा रही थी लेकिन अभी तक पीड़िता को न्याय नहीं मिला। कोतवाली बेनीगंज पुलिस के द्वारा हत्या का मुकदमा दुर्घटना में पंजीकृत कर दिया गया था, जिसके बाद पीड़ित परिवार मासूम के साथ कई दिनों से जिला कलेक्टर मुख्यालय में धरना प्रदर्शन पर बैठा हुआ है। कलेक्टर कार्यालय से महज चंद कदमों की दूरी पर पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद भी अभी तक पीड़ित परिवार की सुनने के लिए कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लाख दावे और वादे करें कि उत्तर प्रदेश में सबसे पहले न्याय महिलाओं को मिल रहा है लेकिन हरदोई (Hardoi) जनपद में कई दिनों से अपने परिवार के साथ धरना प्रदर्शन पर बैठी बुजुर्ग पीड़िता की सुनने के लिए कोई भी प्रशासनिक अधिकारी धरना स्थल पर नहीं पहुंचा। छोटे-छोटे नौनिहाल बच्चों के साथ पीड़िता न्याय की गुहार लगा रही है। आपको बता दें कि हरदोई (Hardoi) जनपद की बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत मासूम के हत्यारों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत नहीं किया, जिसके बाद गुस्साए परिजनों ने रोड जाम कर दिया था। घटनास्थल पर पहुंचे सीओ व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम खोला था। जाम खोलने के बाद किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई।

बेनीगंज कोतवाली पुलिस के द्वारा परिजनों को बिना सूचना दिए ही मासूम का पोस्टमार्टम करवा दिया गया था। पोस्टमार्टम की सूचना पीड़ित परिवार को नहीं दी गई। दबंगों के आगे नतमस्तक हरदोई जनपद का बेनीगंज थाना दबंगों के आगे नतमस्तक दिखाई दे रहा है।

यूपी के हरदोई जनपद की पुलिस लगातार जनपद में हुए सराहनीय कार्य का प्रेस नोट जारी तो कर देती है लेकिन जो वास्तविक फरियादी होते हैं, उनकी फरियाद सुनने के लिए कोई भी प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर नहीं जाता। जनपद का कोई भी थाना हो, हर थाने में बिना रिश्वत किसी की नहीं सुनी जाती। रिश्वत दो, काम करवाओ। हरदोई पुलिस का एक एजेंडा बनता हुआ दिखाई दे रहा है। अब देखने वाली बात यह है कि धरना प्रदर्शन पर बैठे पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या यह मामला यूं ही रफा-दफा कर दिया जाएगा।

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