Prayagraj News : घाटों पर शवों को दफनाने की प्रक्रिया फिर से शुरू

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bodies buried in Cachar

प्रयागराज (Prayagraj) जिले के फाफामऊ सहित कई घाटों पर फिर से शवों को दफनाने का सिलसिला शुरू हो गया है। नगर निगम के पास शवों को जलाने की भी कोई योजना नहीं है। ऐसे में बारिश के मौसम में गंगा नदी में कटाव होने से एक बार फिर शवों के निकाले जाने की आशंका जताई जा रही है।

जगह-जगह शव दफन होने के निशान

फाफामऊ में रेलवे व चंद्रशेखर आजाद पुल के बीच दर्जनों शवों के दबे होने के निशान मिलेंगे। कुछ का कफन भी निकल आया है। यहीं से लोगों को शव के दाह संस्कार की प्रक्रिया के बारे में पता चला। इसके अलावा गंगा की धारा भी शिवकुटी की ओर आ गई है। ऐसे में फाफामऊ में अंतिम संस्कार के लिए कम ही लोग पहुंच रहे हैं।

पैसे के आभाव में दफनाये जाते है शव

फाफामऊ घाट के पंडित श्रीधर मिश्रा व कैप्टन मिश्रा का कहना है कि इन दिनों अंतिम संस्कार में कम लोग आ रहे हैं। ज्यादातर लोग शव को जलाते हैं, लेकिन बच्चों को भी दफनाया जाता है। इसके अलावा गरीब परिवार, जिनके पास लकड़ी खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, वे भी शव को दफनाते हैं।

कछार में स्थिति भयावह

गौरतलब यह भी है कि शव को दफनाने की शिकायत उस घाट सबसे ज्यादा है जहां पर आए दिन किसी न किसी कारण से अधिकारी पहुंच जाते हैं। फाफामऊ घाट पर विद्युत शवदाह गृह बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इसके बावजूद अफसरों को दबे शव नहीं दिखे। कछार के अन्य इलाकों में तो स्थिति और भी खराब है।

शव दफनाने पर पाबन्दी नहीं

अंतिम संस्कार करने वाले पंडितों और अन्य लोगों का कहना है कि जनवरी तक घाट पर शवों को दफनाने पर रोक थी। नगर निगम के अलावा पुलिस टीम भी मौजूद रही। वो लोग लाशें जलाते थे, लेकिन अब ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। इसलिए इन दिनों शवों को दफनाने की शिकायतें बढ़ गई हैं।

शव के अंतिम संस्कार के लिए मिलते थे पांच हजार

नगर निगम के पर्यावरण अधिकारी उत्तम वर्मा का कहना है कि कोविड काल में शवों को दफनाने से रोकने के लिए योजना बनाई गई थी। शव के अंतिम संस्कार के लिए पहले पांच हजार रुपये दिए जाते थे, लेकिन अब ऐसी कोई योजना नहीं है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिषेक का भी कहना है कि शवों के अंतिम संस्कार को लेकर निगम की किसी योजना की उन्हें जानकारी नहीं है।

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