Saturday, January 22, 2022
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हापुड़ विधानसभा सीट पर सियासी योद्धाओं में होगी इस बार दिलचस्प जंग

हापुड़। UP Assembly Election 2022 हापुड़ विधानसभा (सुरक्षित) सीट पर अबतक 17 बार चुनाव हो चुके है। हापुड़ क्षेत्र के मतदाताओं ने राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ एक बार निर्दलीय प्रत्याशी को भी जीत दिलाई थी। सबसे अधिक बार कांग्रेस के आठ प्रत्याशी जीते थे। समाजवादी पार्टी अभी तक हापुड़ सीट पर अपना खाता नहीं खोल सकी है। रामलहर में वर्ष 1991 में भाजपा का हापुड़ सीट पर खाता खुला था। यहां से बिजेंद्र कुमार नक्शे वाले चुनाव में विजयी हुए थे।

हापुड़ विधानसभा सीट पर कई राजनीतिक दलों ने अपने योद्धाओं को चुनावी मैदान में उतार दिया है। इस बार सियासी जंग बेहद दिलचस्प होने बाली है। हापुड़ सीट पर भाजपा के मौजूदा विजयपाल आढ़ती मैदान में हैं तो सपा-रालोद के गठबंधन के प्रत्याशी गजराज सिंह आमने सामने चुनाव मैदान में हैं। गजराज सिंह ने हाल ही में कांग्रेस को छोड़ कर रालोद का हाथ थामा है। बता दें कि गजराज सिंह वर्ष 1985, 1989, 1993 और 2012 में कांग्रेस के टिकट पर हापुड़ विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर चुके हैं। अब तक यह करीब सात चुनाव कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। यही कारण है कि पार्टी के प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं में इनका नाम शामिल है। वर्ष 2017 में भी गजराज सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस चुनाव में इनकी हार हुई थी। वहीं बसपा से दो बार विधायक रहे स्वर्गीय धर्मपाल सिंह के पुत्र मनीष कुमार मोनू ने भी चुनाव मैदान में ताल ठोक दी है। कांग्रेस ने वाल्मीकि कार्ड खेला है और जिला पंचायत सदस्य भावना वाल्मीकि को मैदान में उतारा है।

हापुड़ विधानसभा (सुरक्षित) सीट पर 17 बार चुनाव हो चुका है। क्षेत्र के मतदाताओं ने राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ एक बार निर्दलीय प्रत्याशी को भी जीत दिलाई थी। सबसे अधिक बार कांग्रेस के आठ प्रत्याशी जीते थे। जबकि 1962 में हुए चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी प्रेम सुंदर पर यहां की जनता ने विश्वास कर लखनऊ विधानसभा में भेजा था। रामलहर में वर्ष 1991 में भाजपा का हापुड़ सीट पर खाता खुला था। यहां से बिजेंद्र कुमार नक्शे वाले चुनाव में विजयी हुए थे। 1996 में और 2017 के चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशियों ने बाजी मारी थी। मतदाताओं ने वर्ष 2002 में बसपा के प्रत्याशी पूर्व मंत्री स्वर्गीय धर्मपाल सिंह को चुना था। उसके बाद हुए वर्ष 2007 के चुनाव में भी बसपा प्रत्याशी धर्मपाल सिंह की विजयी हुए थे। समाजवादी पार्टी अभी तक इस सीट पर खाता नहीं खोल सकी है।

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