राणापुर में आज सभी महिलाओ ने किया दशामाता की पूजा-अर्चना

दशामाता व्रत में औरते पीपल के पेड़ की पूजा करती है। जहाँ बताया जाता है कि, पीपल में विष्णु भगवान का वास होता है।

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आज राणापुर नगर में महिलाओं ने दशामाता व्रत किया और साथ ही विधि-विधान से पूजा-अर्चना किया। दशामाता व्रत प्रतिवर्ष चेत्र माह के कृष्ण पक्ष में महिलाओं द्वारा किया जाता है। भक्तो का मानना है कि, दशामाता की पूजा-अर्चना करने से घर परिवार में खुशिया बनी रहती है। माना जाता है कि, इस व्रत को करने से सभी परेशानियां दूर होती हे। दशामाता पूजन त्रिवेणी मतलब तीन वृक्ष की पूजा कर मनाया जाता है। पीपल, नीम व बारगद तीन मै से किसी भी एक वृक्ष की पूजा कर इस व्रत को किया जाता है।

वर्त करने की विधि

दशामाता व्रत आज राणापुर की महिलाओ द्वारा किया गया। जहाँ आज सभी महिलाओ ने दशामाता का व्रत रखा और मंदिर पहुंचकर विधि – विधान से पूजन किया। दशामाता व्रत में औरते पीपल के पेड़ की पूजा करती है। जहाँ बताया जाता है कि, पीपल में विष्णु भगवान का वास होता है। महिलाए कुमुमक गुलाल अबीर चावल आदि से पीपल को पूजती है व उसके बाद पीपल के पेड़ के पास दीप प्रज्ज्वलित करती है। इसी के साथ अपने घर परिवार के लिए सुख समृद्धि की मनोकामना मांगती है। इस दिन महिलाए शूत का डोरा भी गले में बांधती है व व्रत रखती हे। पीपल के पेड़ की महिलाये परिक्रमा भी करती है। वही परिक्रमा करने के दौरान वो कई मंत्रो का जाप भी करती है।

RANAPUR

घर परिवार में सुख शांति के लिए महिलाओ ने की कामना

राणापुर नगर में अलग-अलग जगह पूजा – अर्चना आज की जा रही है। बड़ी संख्या में महिलाएं आज पूजा करने के लिए एकत्रीत हुई है। महिलाओं ने पीपल के पेड़ का पूजन किया और उस पर कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा की। इस व्रत में नमक का सेवन नहीं किया जाता है। पीपल की पूजा करने से इसे पीपल दशा भी कहा जाता है । कहा जाता है कि, नौ ग्रहों और नौ देवियों को प्रसन्न करने के लिए दशामाता का पूजन व्रत किया जाता है। दशा माता का पूजन कर महिलाएं घर परिवार की दशा अच्छी रहने संकटों से मुक्ति मिलने और परिवार के सुख समृद्धि की कामना करती हैं ।

सुबह से है मंदिरो ने महिलाओ की लम्बी कतार

शुभ मुहूर्त के अनुसार, सुबह से ही दशामाता की पूजा करने के लिए महिलाओ की भीड़ मंदिरो में इकट्ठा हो गयी है। जहा सभी महिलाये हाथो में पूजा की थाल लेकर पहुंची है और साथ ही सभी महिलाये रंगबिरंगी साड़िया पहनी हुई है। दशामाता व्रत की पूजन कही भी पूजनीय स्थल पीपल पर की जाती है।

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