चमत्कारिक है 100 साल से भी पुराना बिहार स्थित माँ मुंडेश्वरी धाम मंदिर

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बिहार में एक से बढ़कर एक धार्मिक स्थल हैं जो अपने अंदर ऐसे ऐसे कई रहस्य छुपाए हुए हैं। इन्हीं में से कुछ ऐसे भी हैं धार्मिक स्थल हैं जिनके रहस्य को कोई अब तक समझ नहीं पाया है। ऐसा ही एक बिहार का कैमूर जिला पहाड़ों और जंगलों से घिरा हुआ है। इन्ही पहाड़ों के बीच पंवरा पहाड़ी के शिखर पर मौजूद है माता मुंडेश्वरी धाम मंदिर। ये भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। साल 1812 से लेकर साल 1904 तर ब्रिटिश यात्री आर.एन. मार्टिन, फ्रांसिस बुकानन और ब्लाक ने इस मंदिर का भ्रमण किया था। पुरातत्वविदों के अनुसार यहां के शिलालेख 389 ईस्वी के हैं।

महत्त्व

इस मंदिर को शक्ति पीठ भी कहते हैं जिसके बारे में कई बातें प्रचलित हैं। जो इस मंदिर के विशेष धार्मिक महत्व को दर्शाता है। यहां कई ऐसे रहस्य भी हैं जिसके बारे में अब तक कोई नहीं जान पाया। यहां बिना रक्त बहाए बकरे के बलि दी जाती है और पांच मुख वाले भगवान शंकर की प्राचीन मूर्ति की जो दिन में तीन बार रंग बदलती है। पहाड़ों पर मौजूद माता के मंदिर पर पहुंचने के लिए लगभग 608 फीट ऊंचे पहाड़ की चढ़ाई करनी पड़ती है। यहां प्राप्त शिलालेख के अनुसार यह मंदिर 389 ईस्वी के आसपास का है, जो इसके प्राचीनतम होने का सबूत है।

किवदंतियां

मंदिर बेहद प्राचीन है साथ ही बेहद धार्मिक भी। कहते हैं कि इस मंदिर में माता के स्थापित होने की कहानी भी बड़ी रोचक है। मान्यता के अनुसार इस इलाके में चंड और मुंड नाम के असुर रहते थे, जो लोगों को प्रताड़ित करते थे। जिनकी पुकार सुन माता भवानी पृथ्वी पर आईं थीं और इनका वध करने के लिए जब यहां पहुंचीं तो सबसे पहले चंड का वध किया उसके निधन के बाद मुंड युद्ध करते हुए इसी पहाड़ी पर छिप गया था। लेकिन माता इस पहाड़ी पर पहुंच कर मुंड का भी वध कर दिया था। इसी के बाद ये जगह माता मुंडेश्वरी देवी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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