UP: मंत्री Satish Sharma ने शिवलिंग के पास धोया हाथ, मचा हड़कम्प

सतीश शर्मा (Satish Sharma) के मामले पर समाजवादी पार्टी के नेता ने भाजपा का घेराव करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ के चुप्पी पर भी सवाल खड़ा किया है।

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उतर प्रदेश सरकार में मंत्री सतीश शर्मा (Satish Sharma) का एक वीडियो सामने आया है, जिससे हंगामा मच गया है। दरअसल मंत्री सतीश शर्मा (Satish Sharma) वीडियो में शिवलिंग के पास होथ धोते नज़र आ रहे हैं। इस वीडियो के जारी होने के बाद विपक्षी नेताओं ने बीजेपी व भाजपा नेताओं पर हमला करना शुरू कर दिया है।

जहाँ समाजवादी पार्टी के नेता सुनील सिंह यादव (Sunil Singh Yadav) ने सतीश शर्मा (Satish Sharma) पर निशाना साधते हुए कहा कि अबतक अगर ये काम किसी और जाति के नेता ने किया होता तो बीजेपी वाले उसे पार्टी से बाहर निकाल चुके होते। सतीश शर्मा (Satish Sharma) के मामले पर समाजवादी पार्टी के नेता ने भाजपा का घेराव करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ के चुप्पी पर भी सवाल खड़ा किया है।

समाजवादी पार्टी नेता सुनील सिंह यादव ने मंत्री सतीश शर्मा के शिवलिंग के पास हाथ धोने वाले वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए लिखा, ‘लोधेश्वर शिवलिंग पर हाथ धोने वाला अधर्मी सतीश शर्मा योगी आदित्यनाथ सराकर में राज्यमंत्री है और साथ में ब्राह्मणो के स्वघोषित इंपोर्टेड चेहरे भी खड़े हैं। यही काम यदि किसी अन्य जाति के नेता ने किया होता तो अब तक पाखंडी भाजपाई उसका निष्कासन करा चुके होते। वैसे बाबा (योगी आदित्यनाथ) चुप क्यों हैं?’ बता दें कि सतीश शर्मा के इस वीडियो पर भाजपा को जमकर ट्रोल किया जा रहा है।

यह वीडियो बाराबंकी का है, जहां रामपुर स्थित पौराणिक लोधेश्वर महादेव मंदिर में सतीश शर्मा पूजा करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने मंदिर में पूजा अर्चना की और हाथ को शिवलिंग के पास ही धो लिया। इस वीडियो पर यूपी कांग्रेस ने रिएक्ट करते हुए एक्स पर लिखा, ‘उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सतीश शर्मा शिवालय में शिवलिंग के अर्घ्य से सटाकर ही हाथ धो रहे हैं। बगल में एक और मंत्री जितिन प्रसाद खड़े होकर टकटकी निगाह से देख रहे हैं। धर्म के नाम पर, देवी-देवताओं के नाम पर राजनीति करने वाले और कुर्सी पर बैठने वाले इन नीचों के पास इतनी सामान्य सी बुद्धि भी नहीं कि शिवलिंग के समीप हाथ नहीं धोया जाता। इन दुर्बुद्धि वालों के लिए हमारी आस्था, हमारा विश्वास, हमारे देवी-देवता केवल राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के साधन मात्र हैं। उससे अधिक ना इन्हें ईश्वर में आस्था है, ना ही जनता की आस्था में विश्वास।’

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