वाराणसी: ज्ञानवापी केस में हिंदू पक्ष के एक साथ आने के आसार प्रबल

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वाराणसी: ज्ञानवापी और माँ श्रृंगारी गौरी केस (Gyanvapi case) में दो गुटों में बट चुके हिंदू पक्ष के एक साथ आने के आसार प्रबल हो गए है। प्रतापगढ़ के राजघराने के महाराज उदय प्रताप सिंह के केस में एंट्री होने के बाद से लगातार दोनों हिंदू पक्ष के बीच दूरियां समाप्त होती दिखाई दे रही है। विश्व वैदिक सनातन संघ की ओर से भदरी राजघराने के उदय प्रताप सिंह को केस का पावर ऑफ अटॉर्नी दिए जाने के बाद हिंदू पक्ष के दोनो गुटों में बात शुरू हो गई है। इसकी पुष्टि खुद उदय प्रताप सिंह ने वाराणसी में की है। उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जब से वह केस में आए हैं तब से हिंदू पक्ष के दूसरे गुट के अधिवक्ता उनसे संपर्क कर मिलना चाह रहे है और वह भी चाहते है कि हिंदू पक्ष एक साथ मजबूती से इस केस को लड़े।

ज्ञानवापी केस (Gyanvapi case) में दो गुटों में बँटे हिंदू पक्ष की चार महिलाओं के अधिवक्ताओं ने बद्री राजघराने के नरेश उदय प्रताप सिंह से मुलाकात करने की पहल की है। उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जल्द ही हिंदू पक्ष एक साथ बैठकर इस पूरे केस पर चर्चा करेगा और सभी विवाद को खत्म किया जाएगा। ज्ञानवापी से जुड़े दो प्रमुख मुकदमों की पावर ऑफ अटॉर्नी उदय प्रताप सिंह को सौंपी गई है। जिसके बाद से ही लगातार हिंदू पक्ष के दोनों गुट सभी विवादों को समाप्त करना चाहते हैं।

उदय प्रताप सिंह ने बताया कि जो भी विवाद है उसे बातचीत के माध्यम से दूर किया जाएगा। ज्ञानवापी और मां श्रृंगार गौरी के नित्य दर्शन पूजन के केस की वादी महिलाओं और अधिवक्ताओं के विवाद के बाद केस पर प्रभाव पड़ रहा था। वहीं हिंदू पक्ष में विवाद के बाद लगातार हिंदू पक्ष की वादी महिलाएं और अधिवक्ता एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहे। वहीं इन सबके बीच करीब एक वर्ष तक केस के पैरोकार विश्व वैदिक सनातन संघ प्रमुख जितेंद्र सिंह विसेन वाराणसी नहीं आए। वहीं अब विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह के द्वारा दो प्रमुख पावर आफ अटॉर्नी उदय प्रताप सिंह को बनाए जाने के बाद हिंदू पक्ष के दूसरे गुट से वार्ता शुरू हो गई है। ऐसे में दोनों गुट में यदि विवाद सुलझ जाता है, तो ज्ञानवापी केस (Gyanvapi case) में एक बार फिर हिंदू पक्ष मजबूती से केस को लड़ेगा।

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