जानिए निर्जला एकादशी व्रत के महत्त्व

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हिन्दू धर्म के अनुसार सभी व्रतों का अलग-अलग महत्व है। बताया जाता है की व्रत रखने से भक्तों पर भगवान की कृपा बनी रहती है और घर में सुख समृद्धि की वर्षा होती है। इन सभी व्रतों में ‘निर्जला एकादशी व्रत’ बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इस विशेष दिन पर लोग व्रत का पालन करते हैं और भगवान विष्णु की उपासना करते हैं। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार ये व्रत सबसे अधिक फलदायी होता है।

क्या है निर्जला एकादशी

निर्जला एकादशी एक हिंदू पवित्र दिन है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ (मई/जून) के महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी को “निर्जला एकादशी ” कहा जाता है। इस एकादशी का नाम इस दिन मनाए जाने वाले निर्जल (निर्जला) व्रत से लिया गया है। इसे सबसे कठोर माना जाता है और इसलिए सभी 24 एकादशियों में सबसे पवित्र माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो यह सबसे अधिक फल देने वाली एकादशी बताई गई है।

दंतकथा

निर्जला एकादशी को पांडव भीम एकादशी या पांडव निर्जला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम हिंदू महाकाव्य महाभारत के नायकों, पांच पांडव भाइयों के दूसरे और सबसे मजबूत भीम से लिया गया है। ब्रह्म वैवर्त पुराण निर्जला एकादशी व्रत व्रत के पीछे की कहानी बताता है। भीम, भोजन के प्रेमी, सभी एकादशी व्रतों का पालन करना चाहते थे, लेकिन अपनी भूख को नियंत्रित नहीं कर सके। उन्होंने समाधान के लिए महाभारत के लेखक और पांडवों के दादा ऋषि व्यास से संपर्क किया। ऋषि ने उन्हें निर्जला एकादशी का पालन करने की सलाह दी, जब उन्हें वर्ष में एक दिन पूर्ण उपवास करना चाहिए। भीम ने निर्जला एकादशी का पालन करके सभी 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त किया।

निर्जला एकादशी 2023 तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का शुभारंभ 30 मई 2023 को दोपहर 01 बजकर 07 मिनट तक रखा जाएगा। वहीं इस तिथि का समापन 31 मई को दोपहर 01 बजकर 45 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, यह व्रत 31 मई 2023, बुधवार के रखा जाएगा।

निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी व्रत की गणना कठिन उपवास में की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जो लोग 24 एकादशी व्रत नहीं रख पाते हैं, उन्हें साल में एक बार निर्जला एकादशी व्रत अवश्य रखना चाहिए। ऐसा करने से सभी एकादशी व्रतों का फल साधक को प्राप्त हो जाता है और परिवार को सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में आ रही सभी समस्याएं दूर हो जाती है।

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