जानिए क्या है गीता जयंती और इसे मनाने का महत्त्व

0

प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है। गीता जयंती पारंपरिक हिंदू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष (चंद्रमा के बढ़ते चरण) के 11 वें दिन मनाई जाती है। इस साल 22 दिसंबर को गीता जयंती है। आइए जानते हैं, आखिर क्यों हर साल हम गीता जयंती मनाते है और क्या है इसका महत्त्व ?

मान्यता है कि जिस दिन श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। उस दिन मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी थी, इसीलिए इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।

इस दिन उपवास करने की मान्यता है। गीता जयंती के दिन उपवास करने से मन पवित्र होता है और शरीर स्वस्थ रहता है। साथ ही समस्त पापों से भी छुटकारा मिलता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को धर्म और कर्म को समझाते हुए उपदेश दिया था।

गीता ही एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसकी हर साल जयंती मनाई जाती है। गीता को श्रीमद्भगवद्गीता और गीतोपनिषद के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि गीता के उपदेशों का अनुसरण करने से समस्त कठिनाइयों और शंकाओं का निवारण होता है।

गीता में श्रीकृष्ण के द्वारा बताए गए उपदेशों पर चलने से व्यक्ति को कठिन से कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है। गीता के उपदेश में जीवन को जीने की कला, प्रबंधन और कर्म सब कुछ है। इसलिए इस दिन गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here