PM Modi: विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव हमारे लिए शुभ

पीएम मोदी ने कहा कि भगवान अपने काम किसी न किसी के जरिए कराते हैं। यही कारण है कि विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।

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केंद्र की मौजूदा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस का आज आखिरी दिन है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पूरी चर्चा का जवाब दे रहे हैं और उसके बाद अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होगी। बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव पर 8 अगस्त को चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) ने की थी।

इसके बाद 9 अगस्त को राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने विपक्ष पर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। इसके बाद आज 10 अगस्त को अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र पर निशाना साधा। इस दौरान अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ये अविश्वास प्रस्ताव की ताकत ही है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में खींच लाई है। हालांकि, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कई मुद्दों पर बात की।

भगवान अपने काम किसी न किसी के जरिए कराते हैं: PM

पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान अपने काम किसी न किसी के जरिए कराते हैं। यही कारण है कि विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को उन्होंने भाजपा और एनडीए के लिए शुभ बताते हुए कहा कि आपने यह तय कर लिया है कि बीजेपी और एनडीए पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी और जनता के आशीर्वाद के साथ फिर सरकार में आएगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2018 में भी यह ईश्वर का ही आदेश था, जब विपक्ष के मेरे साथी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए थे। उस समय भी मैंने कहा था कि अविश्वास प्रस्ताव हमारी सरकार का फ्लोर टेस्ट नहीं है, बल्कि ये उन्हीं (विपक्ष) का फ्लोर टेस्ट है। हुआ भी यही।

‘विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव हमारे लिए शुभ होता है’

उन्होंने आगे कहा कि जब मतदान हुआ, तो विपक्ष के पास जितने वोट थे, उतने वोट भी वो जमा नहीं कर पाए थे। इतना ही नहीं, जब हम सब जनता के पास गए तो जनता ने भी पूरी ताकत के साथ इनके लिए नो-कॉन्फिडेंस घोषित कर दिया और चुनाव में एनडीए को भी ज्यादा सीटें मिलीं और भाजपा को भी ज्यादा सीटें मिलीं। यानी एक तरह से विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव हमारे लिए शुभ होता है।

पीएम ने आगे कहा कि अच्छा होता कि सत्र की शुरुआत के बाद से ही विपक्ष ने गंभीरता के साथ सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया होता। बीते दिनों दोनों सदनों ने जनविश्वास बल, डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन बिल जैसे कई महत्वपूर्ण बिल यहां पारित किए और। ऐसे बिल भी थे कि जो हमारे मछुआरों के हक में थे, जिसका फायदा केरल के मछुआरों को होना था। केरल के सांसद तो इस पर अच्छे से हिस्सा लेते थे, राजनीति ऐसी हावी है कि उन्हें इसी बिल की चिंता नहीं है।

आने वाला समय तकनीक से चलेगा: PM

उन्होंने कहा, हिंदुस्तान साइंस पावर के रूप में कैसे उभरे, उससे जुड़े बिल पर भी आपका ऐतराज? डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन बिल भी देश के युवाओं के जज्बे से जुड़ा हुआ था। आने वाला समय तकनीक से चलेगा, आज डेटा को एक प्रकार से सेकेंड ऑयल, सेकेंड गोल्ड के रूप में माना जाता है। उस पर गंभीर चर्चा की जरूरत थी, लेकिन राजनीति आपके लिए प्राथमिकता थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की जनता ने उन्हें जिस काम के लिए यहां भेजा है, उस जनता का भी विश्वासघात किया गया है। विपक्ष के कुछ दलों ने उनके आचरण और उनके व्यवहार से सिद्ध कर दिया है कि उनके लिए देश से बड़ा दल है। देश से पहले प्राथमिकता दल है। मैं समझता हूं कि आपको गरीब की भूख की चिंता नहीं है, सत्ता की भूख ही आपके दिमाग में सवार है। आपको देश के युवाओं के भविष्य की परवाह नहीं, अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता है। इन्होंने एक दिन सदन चलने भी दिया, लेकिन किस काम के लिए? अविश्वास प्रस्ताव के लिए और अपने कट्टर भ्रष्ट साथियों की शर्त पर मजबूर होकर जुटे।

फील्डिंग विपक्ष ने लगाई, लेकिन चौके-छक्के यहीं (सत्तापक्ष) से लगे: PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, अविश्वास प्रस्ताव पर भी आपने कैसे चर्चा की? आपके दरबारी भी सोशल मीडिया पर बहुत दुखी हैं। मजा देखिए। फील्डिंग विपक्ष ने लगाई, लेकिन चौके-छक्के यहीं (सत्तापक्ष) से लगे। इधर तो सेंचुरी हो रही है, लेकिन विपक्ष नो बॉल पर ही चर्चा करता जा रहा है। मैं विपक्ष के साथियों से यही कहूंगा कि तैयारी करके क्यों नहीं आते जी? थोड़ी मेहनत कीजिए। मैंने पांच साल दिए थे आपको तैयारी के लिए।

उन्होंने आगे कहा, 2018 में मैंने कहा था कि तैयारी करके आना। क्या हाल है आपका? क्या दारिद्र है? विपक्ष के हमारे साथियों को दिखास की, छपास की इच्छा रहती है, स्वाभाविक है। आप ये मत भूलिए कि देश भी आपको देख रहा है। आपके एक-एक शब्द को देश गौर से सुन रहा है, लेकिन हर बार देश को आपने निराशा के सिवा कुछ नहीं दिया। विपक्ष के रवैये पर कहूंगा कि जिनके खुद के बही-खाते बिगड़े हुए हैं, वो भी हमसे हमारा हिसाब पूछते हैं।

अधीर रंजन के भाषण पर पीएम ने कही ये बात

पीएम ने कहा, सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता का बोलने की सूची में नाम ही नहीं था। 1999 में वाजपेयी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया। तब शरद पवार साहब ने नेतृत्व किया। 2003 में अटलजी की सरकार थी। सोनिया जी ने लीड ली, प्रस्ताव रखा। 2018 में खडगे जी थे, उन्होंने इसे आगे बढ़ाया, लेकिन इस बार अधीर बाबू का क्या हाल हो गया? उनकी पार्टी ने उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया, ये तो कल अमित भाई ने बहुत जिम्मेदारी के साथ कहा कि अच्छा नहीं लग रहा है। आपकी उदारता थी कि समय समाप्त हो गया था, तब भी आपने उन्हें मौका दिया। लेकिन गुड़ का गोबर कैसे करना, इसमें ये माहिर हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पता नहीं हो सकता है इंडिया से कोई फोन आया हो। कांग्रेस बार-बार उनका अपमान करती है। कभी चुनावों के नाम उन्हें अस्थाई रूप से उन्हें हटा देते हैं। हम अधीर बाबू के प्रति अपनी पूरी संवेदना व्यक्त करते हैं। …जरा जोर से हंस लीजिए।

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