अवैध पटाखा फैक्ट्री संचालक में अग्निशमन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

0

Kaushambi: कोखराज थाना क्षेत्र के भरवारी कस्बे में अवैध पटाखा फैक्ट्री (illegal firecracker factory) के संचालन के बाद विस्फोट में लाशों के ढेर लग जाने के बाद अग्नि शमन विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। भरवारी कस्बे के अलावा जिले के पश्चिमी छोर से लेकर पूर्वी छोर तक, उत्तरी छोर से लेकर दक्षिणी छोर तक विभिन्न कस्बो में अवैध पटाखा फैक्ट्री का संचालन अभी भी हो रहा है।

आखिर खतरनाक पटाखा फैक्ट्री (illegal firecracker factory) के संचालन में अग्नि शमन विभाग द्वारा अभी तक सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं? मानक विहीन चल रही पटाखा फैक्ट्री पर रोक लगाने के लिए अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने क्या उपाय किए हैं, जिससे आम जनता का जीवन सुरक्षित हो सके लेकिन असुरक्षित पटाखा फैक्ट्री को बंद करने की ओर विभाग ने भी पहल नहीं किया बल्कि छोटे पटाखे बिक्री के नाम पर पटाखा निर्माण का अनापत्ति प्रमाण पत्र देकर उन्हें जिला अधिकारी द्वारा लाइसेंस जारी करने में मदद की गयी है। जिसका नतीजा यह रहा कि जिले में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया।

भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय के एक्सक्लूसिव लाइसेंस के जरिए पटाखा फैक्ट्री संचालक की अनुमति दी जाती है लेकिन जिले के किसी भी पटाखा फैक्ट्री (illegal firecracker factory) के पास भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय से अनुमति नहीं मिली है। उसके बाद जिले में कैसे तीन दर्जन से अधिक पटाखा फैक्ट्री का संचालन हो रहा है। यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया लेकिन पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट होने के बाद भी ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। फिर पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ तो कौन जवाब देह होगा? लेकिन घटना को चार दिन बीत जाने के बाद अवैध तरीके से संचालित लगभग तीन दर्जन अवैध पटाखा फैक्ट्रीयों को बंद करने का प्रयास नहीं किया गया है। अवैध तरीके से संचालित पटाखा फैक्ट्रीयों को आखिर क्यों बंद नहीं कराया जा रहा है? इसके पीछे उनका क्या स्वार्थ छुपा हुआ है? यह जन चर्चा का विषय बन चुका है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here