वाराणसी: रामायण की लोकप्रियता का प्रमाण यह है कि 1987 में बनी रामायण कोविड काल में दूरदर्शन पर पुनः प्रसारित हुई। वही अस्सी के दशक में लोग पूजा की थाली लेकर टीवी पर ही रामायण धारावाहिक के पात्रों की आरती करते थे। आज सिनेमाघरों से ‘आदिपुरुष’ (film Adipurush) को देखकर बाहर निकलने वाले लोग क्षोभ और दुख से भरे हैं। वही दर्शक इस फ़िल्म को बनाने वाले लोगों को भला-बुरा कह रहे हैं।
फिल्म आदिपुरुष (film Adipurush) में जिस तरह की भाषा और अंदाज़ के डायलॉग बोले गए हैं, वे पवित्र राम कथा के पात्रों की मर्यादा और उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ करते हैं। वही धूर्तता के साथ फ़िल्मकारों द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि आज की नई पीढ़ी को समझाने के लिए इस तरह की टपोरी भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इससे साफ़ ज़ाहिर है कि हमारे आराध्य भगवानों की छवि को युवा पीढ़ी के मन में टपोरियों की तरह दिखाने के लिए ही षड्यंत्रपूर्वक यह फ़िल्म बनायी गई है। इसलिए हम काशीवासी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यह माँग करते हैं कि उत्तरप्रदेश में आदिपुरुष फ़िल्म पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। वही फिल्म निर्माता, निर्देशक, संवाद लेखक एवं कलाकारों को इस दुष्कृत्य पर सजा हो क्योंकि इन लोगों ने गम्भीर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अपराध किया है।














