बलिया: आस्था और विश्वास की अनोखी कहानी

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Ballia

Ballia: जहाँ भारत अपनी अद्भुत संस्कृति और सभ्यता के लिए लिए जाना जाता है वहीं भारत में अनेक धर्मो को मानने वाले लोग रहते है। इस देश मे आस्तिक भी है और नास्तिक भी। आस्तिक वो जो भगवान की पूजा करते है और नास्तिक वो जो भगवान को नही मानते। कहते है मानो तो देव नही तो पत्थर यानी जिस पत्थर को भगवान मान लिया वो आस्था का मंदिर है। जिसे पत्थर को पत्थर माना वो आप के पैरों तले है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला बलिया में, भगवान शिव की ऐसी भक्ति जिसे देख और सुन आप भी हैरान हो जाएंगे।

दरअसल सावन माह की शुरुआत हो चुकी है और पूरे सावन हिन्दू धर्म मे भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसी कड़ी में झारखण्ड में स्थित बाबा बैद्यनाथ का दर्शन कर उनका जलाभिषेक करने का महत्व है। देश के कोने-कोने से लाखों लोग बाबा बैद्यनाथ का दर्शन करने के लिए कांवर लेकर पहुंचते हैं। जिसकी शुरुआत हो चुकी है और यूपी के बलिया (Ballia) से भी लोग अपने सुविधा अनुसार वाहनों, ट्रेनों से बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे है।

सुल्तानपुर से लोग गंगा स्नान कर जल लेते है और सैकड़ों किलोमीटर शिव की भक्ति में लीन मन्दिर तक पहुंचते है, लेकिन जरा भगवान शिव के इस अनोखे भक्त से मिले। ये है भगवान शिव के महाभक्त जो 12 साल तक बिना अन्न ग्रहण किये अपने गृह जनपद बलिया से झारखंड में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम नंगे पैर पैदल यात्रा कर पहुंचते है। उन्होंने वहाँ पहुँचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने का संकल्प लिया है। यही नही मौन धारण करने का संकल्प भी लिया है। जब तक भक्ति का यह संकल्प पूरा नही होगा तब तक वह मौन रहेंगे। यह जानकारी अखिलेश कुमार के भतीजे सागर कुमार ने पत्रकारों के साथ साँझा की। आपको बता दें कि अखिलेश कुमार बलिया (Ballia) जनपद के हल्दी थाना अंतर्गत मझौवा गांव के रहने वाले है।

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