बंडा: नवयुवक सरपंच के खिलाफ घोटाले का आरोप

गूगरा पंचायत की जहाँ नवयुवक सरपंच है अभी इनको 2 साल ही हुए थे सरपंच बने की इनकी कार्यशैली से ग्रामीण इतने परेशान हो गए कि इनके खिलाफ शिकायत पर उतारू हो गए।

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बंडा शाहगढ़ जनपद पंचायत के गूगरा खुर्द ग्राम पंचायत से एक मामला सामने आया है। जहाँ सरपंच के द्वारा कराए गए निर्माण कार्यों में गजब का घोटाला देखने को मिला है। जैसे नाली, टंकी, रोड, सोखते के गड्डे ऐसा कोई भी निर्माण कार्य नहीं हुआ। जिसमे घोटाला चरम पर न हुआ हो। गूगरा पंचायत की जहाँ नवयुवक सरपंच है अभी इनको 2 साल ही हुए थे सरपंच बने की इनकी कार्यशैली से ग्रामीण इतने परेशान हो गए कि इनके खिलाफ शिकायत पर उतारू हो गए। सरपंच की दबंगई भी इतनी की शिकायत करने वालो को धमकियां दी जाती है लेकिन आज तक इन पर कोई भी कार्यवाही नही हुई है।

सरपंच के द्वारा कई घोटाले जो सामने आये है। जहाँ पानी की टंकी के निर्माण की ग्रामीणों की माने तो गांव में दो टंकियों का निर्माण होना था, जिसके लिए बकायदा राशि तो निकली गई लेकिन टंकियों का निर्माण ही नहीं कराया गया और राशि का बंदरबांट कर लिया गया। इसके बाद सोकपिट निर्माण की गांव में कुल 10 सोकपिट का निर्माण होना था लेकिन कही भी सोकपिट नजर नही आये, एक दो कच्चे गड्ढे खोद कर बस खानी पूर्ति कर पैसा निकल लिया गया।

ऐसा ही हाल है शासकीय स्कूल के पास सार्वजनिक चबूतरे के निर्माण का जिसके लिए भी बस खाना पूर्ति कर राशि निकल ली गई। गांव में नालियों के निर्माण में तो इतनी भरी अनियमितताएं की गई की गांव की ऐसी कोई सड़क नहीं है जो कीचड़ न हो यहां तक की गांव के मुख्य मंदिर के मुख्य मार्ग पर भी चारो ओर कीचड़ फैला हुआ है। अगर गांव के एक मात्र सामुदायिक भवन की बात करे तो सामुदायिक भवन का निर्माण किया गया है। जिसमे केबल एक कमरे का निर्माण किया गया है, जिसकी गुणवत्ता बिलकुल ही खराब है।

ग्रामीणों की मिली जानकारी के अनुसार सरपंच बीजेपी के बड़े नेता हैं और मोहन केबिनेट में मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल के करीबी बताए जाते है और बात- बात पर ग्रामीणों और पत्रकारों को मंत्री के नाम से धमकाते देखे जाते है। अब देखने वाली बात होगी की इस पूरी रिपोर्ट के बाद भ्रष्ट सरपंच पर क्या कार्यवाही होगी या फिर मंत्री की आड़ में पूरे मामले पर लीपा-पोती कर दी जाएगी।

वही एक शिकायत पत्र आया था जिसकी जांच कराई गयी है, जिसमें कई निर्माण कार्य में अनियमित पाई गई। जिससे सरपंच के विरुद्ध में प्रतिवेदन बनाकर उच्च अधिकारी को भेज दिया गया है।

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