औद्योगिक प्लॉट ट्रांसफर करने के आरोप में पंजाब के पूर्व मंत्री, अधिकारियों के खिलाफ मामला हुआ दर्ज

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (पीवीबी) ने गुरुवार को पूर्व उद्योग और वाणिज्य मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा और 10 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ एक रियल एस्टेट कंपनी को एक औद्योगिक भूखंड हस्तांतरण करने के आपराध में मामला दर्ज किया।

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पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने प्रदेश के औद्योगिक प्लॉट की अलॉटमेंट और खरीद-फरोख्त मामले में दर्ज केस में पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा समेत कुल 14 सीनियर अफसरों को नामजद किया है। आरोपियों में PSIDC के CGM, XEN और अन्य अधिकारी शामिल हैं। इनकी पहचान आशिमा अग्रवाल एटीपी (योजना), JS भाटिया मुख्य महाप्रबंधक (योजना), दविंदरपाल सिंह जीएम कार्मिक, परमिंदर सिंह कार्यकारी अभियंता, जोगिंदरपाल सिंह और संपदा अधिकारी अंकुर चौधरी समेत रजत कुमार DA, संदीप सिंह के रूप में हुई है। इनमें से पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (PSIDC) के कुल 7 IAS और PCS अधिकारियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। स्टेट विजीलैंस ब्यूरो के एक प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब सरकार ने वर्ष 1987 में 25 एकड़ जमीन ‘आनंद लैम्प्स लिमिटेड’ को आवंटित की थी, उसके बाद में ‘सिग्निफाई इनोवेशन्स’ फर्म को दे दी गयी । यह प्लॉट बाद में ‘गुलमोहर टाउनशिप’ को बेच दिया गया था।

जाब विजीलैंस ब्यूरो (VB) ने पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा, और 10 अन्य अधिकारियों के खिलाफ एक औद्योगिक भूखंड को एक रियल्टर कंपनी को स्थानांतरित करने और इस तरह एक टाउनशिप स्थापित करने की अनुमति देने के लिए एक मामला दर्ज किया। इस मामले में फर्म गुलमोहर टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड के तीन मालिकों पर मामला दर्ज किया गया है। वीबी ने पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (PSIDC) के सात अधिकारियों को गिरफ्तार किया है।

आखिरकार ये मामला है क्या?

स्टेट विजीलैंस ब्यूरो के बताया कि पंजाब सरकार ने वर्ष 1987 में ‘आनंद लैम्प्स लिमिटेड’ को 25 एकड़ जमीन आवंटित की थी, जिसे बाद में ‘सिग्निफाई इनोवेशन्स’ फर्म को हस्तांतरित कर दिया गया। बाद में पंजाब राज्य औद्योगिक विकास निगम (PSIDC) से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद ‘सिग्निफाई इनोवेशन’ द्वारा इस जगह को ‘गुलमोहर टाउनशिप’ को बेच दिया गया था।

मार्च 2021 में, उद्योग और वाणिज्य मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने भूखंडों के आगे विभाजन के लिए ‘गुलमोहर टाउनशिप’ से प्राप्त तत्कालीन एमडी पीएसआईडीसी को एक पत्र भेजा। विजिलेंस के प्रवक्ता ने आगे बताया कि 1987 के डीड के अनुसार इस प्लॉट का उपयोग केवल औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाना था।

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