वाराणसी: मकर संक्रांति के मद्देनजर पतंगों से सजे बाजार

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Varanasi: भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) को मनाने की अपनी परंपरा और रीति-रिवाज है। इस त्योहार को पंजाब में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर खिचड़ी पर्व जैसे नामों से जाना जाता है। मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के इस महापर्व के भले ही कई नाम हों, लेकिन इसको मनाने के पीछे का उद्देश्य एक-दूसरे में खुशियां बांटना ही है। बात की जाये तो पतंग की भी दुकान सज गयी लेकिन इस बार सबसे अधिक बुलडोजर वाली पतंग की डिमांड है।

आस्था और धर्म की नगरी वाराणसी (Varanasi) में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर पतंग खूब उड़ाई जाती है। पतंगों का शौक ही ऐसा है कि बचपन बीते पचपन साल क्यों न हो गए हैं लेकिन उसका रंग जस का तस है। बुजुर्गियत के कारण जो नहीं उड़ा पाते, वे अपने बच्चों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वहीं किशोरों और युवाओं का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है, जिसके लिए हर पतंग सिर्फ एक पतंग है। जबकि शौकीन लोग पतंगबाजी कर रहे हों या नहीं मगर हर पतंग को वे नाम से पहचानते हैं। पतंगों के इन अजब गजब नामों में अब बुलडोजर का नाम भी शामिल हो चुका है। इस पतंग की एक तो बनावट खास है। दूसरे इसकी खासियत यह है कि यह बहुत तेज हवा में भी आसानी से नियंत्रित की जा सकती है।

वाराणसी (Varanasi) के पतंग स्टोर के संचालक बताते हैं ज्यादातर पतंगों के नाम तो अब भी पुराने हैं लेकिन उनका कलेवर काफी बदल गया है। काशी विश्वनाथ धाम, नमो घाट और कैंट रेलवे स्टेशन के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बुलडोजर वाली पतंग बहुत अधिक डिमांड में है। चांदतारा, धारा, कंठा कुछ ऐसी पतंगें हैं जो अब भी जस की तस हैं। मांगदार, आंखदार, पौनी चांदतारा, मोरपंखी, गिलासा, अद्धा, बद्धा, टोपा, उल्टाटोपा, पट्टा, मांगदार बेलमतारा, मांगदार चांदतारा पतंगें अब भी शौकिया पतंगबाजों की खास पहचान बनी हुई हैं। गिलासा नाम वाली बनारसी पतंग की बनावट में 40 साल बाद भी कोई अंतर नहीं आया है। कंठा दो रंग वाली यह पतंग बरेली के बाजार की सबसे पुरानी पहचानों में से एक है। बस दुकानदारों को चिंता सता रहा है कि मौसम सही रहा तो इस बार बुलडोजर वाली पतंग आकाश में दिखेगी और उसके साथ ही नमो घाट की पतंग भी दिखेगी।

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