विश्व गौरैया दिवस: एक छोटा जीव बड़ी पहचान

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World Sparrow Day: गौरैया (Sparrow) एक घरेलू चिड़िया है जो यूरोप और एशिया में सामान्य रूप से हर जगह पाई जाती है। यह विश्व में सबसे अधिक पाए जाने वाले पक्षियों में से है। लोग जहाँ भी घर बनाते हैं, देर-सबेर गौरैया के जोड़े वहाँ रहने पहुँच ही जाते हैं।

सामान्य परिचय

गौरैया (Sparrow) एक छोटी चिड़िया है। यह हल्की भूरे रंग या सफेद रंग में होती है। इसके शरीर पर छोटे-छोटे पंख और पीली चोंच व पैरों का रंग पीला होता है। नर गौरैया की पहचान उसके गले के पास काले धब्बे से होती है। 14 से 16 सेमी लंबी यह चिड़िया मनुष्य के बनाए हुए घरों के आसपास रहना पसंद करती है। इसे हर तरह की जलवायु पसंद है। गाँवों- कस्बों-शहरों और खेतों के आसपास यह बहुतायत से पायी जाती है। नर गौरैया के सिर का ऊपरी भाग, नीचे का भाग तथा गालों का रंग भूरा होता है। गला, चोंच और आँखों पर काला रंग होता है। जबकि मादा चिड़िया के सिर और गले पर भूरा रंग नहीं होता। लोग इन्हें चिड़ा-चिड़िया भी कहते हैं। यह निहायत ही घरेलू किस्म का पक्षी है, जो यूरोप और एशिया में सामान्य रुप से पाया जाता है। मनुष्य जहाँ-जहाँ भी गया, इस पक्षी ने उसका अनुसरण किया। उन्हीं के घरों के छप्परों में घोंसला बनाया और रहने लगा। इस तरह यह अफ़्रीका, यूरोप, आस्ट्रेलिया और एशिया में सामान्यतया पाया जाने लगा।

नर गौरैया का धार्मिक महत्त्व

भारतीय पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह चिड़िया जिस भी घर में या उसके आंगन में रहती है, वहाँ सुख और शांति बनी रहती है। खुशियां उनके द्वार पर हमेशा खड़ी रहती है और वह घर दिनों दिन तरक्की करता रहता है। इसके अलावा भी हिंदू धर्म में ऐसे और भी पक्षी हैं जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। पक्षियों को हिंदू धर्म में देवता और पितर माना गया है। कहते हैं जिस दिन आकाश से पक्षी लुप्त हो जाएंगे उस दिन धरती से मनुष्य भी लुप्त हो जाएगा। किसी भी पक्षी को मारना अपने पितरों को मारना माना गया है।

विलुप्त होती गौरैया

घरों को अपनी चीं चीं से चहकाने वाली गौरैया (Sparrow) अब दिखाई नहीं देती। इस छोटे आकार वाले खूबसूरत पक्षी का कभी इंसान के घरों में बसेरा हुआ करता था और बच्चे बचपन से इसे देखते बड़े हुआ करते थे। अब स्थिति बदल गई है। गौरैया के अस्तित्व पर छाए संकट के बादलों ने इसकी संख्या काफ़ी कम कर दी है और कहीं कहीं तो अब यह बिल्कुल दिखाई नहीं देती। पहले यह चिड़िया जब अपने बच्चों को चुग्गा खिलाया करती थी तो इंसानी बच्चे इसे बड़े कौतूहल से देखते थे। लेकिन अब तो इसके दर्शन भी मुश्किल हो गए हैं और यह विलुप्त हो रही प्रजातियों की सूची में आ गई है। पक्षी विज्ञानी हेमंत सिंह के मुताबिक़ गौरैया की आबादी में 60 से 80 फीसदी तक की कमी आई है। यदि इसके संरक्षण के उचित प्रयास नहीं किए गए तो हो सकता है कि गौरैया इतिहास की चीज बन जाए और भविष्य की पीढ़ियों को यह देखने को ही न मिले।

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