राजनीतिक गलियों का माहौल इन दिनो खूब गरमाया हुआ है। जहां एक पक्ष दूसरे पक्ष पर तंज कसता हुआ नजर आ रहा है। अब इसी बीच कांग्रेस ने आज अपने महाराष्ट्र में सहयोगी शरद पवार की इस टिप्पणी से खुद को अलग कर लिया कि, अदाणी समूह पर अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट एक ‘लक्षित’ हमला प्रतीत होती है। एनसीपी के प्रमुख शरद पवार ने अदाणी समूह का पुरजोर समर्थन किया और समूह पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट की आलोचना भी की।
हालांकि, कांग्रेस ने एक बयान में कहा कि, अदाणी समूह का मामला कथित तौर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘जुड़ा’ है और बहुत गंभीर है। कांग्रेस विपक्षी दलों के एक बड़े समूह में से एक है, जो अदाणी-हिंडनबर्ग की एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच की मांग कर रही है।
वही शरद पवार के बयान के बाद कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि, “एनसीपी का अपना विचार हो सकता है, लेकिन 19 समान विचारधारा वाले दलों का मानना है कि पीएम से जुड़े अदाणी समूह का मुद्दा वास्तविक और बहुत गंभीर है।”
जयराम रमेश ने आगे कहा कि, “राकांपा सहित सभी 20 समान विचारधारा वाले विपक्षी दल एकजुट हैं और संविधान और हमारे लोकतंत्र को बीजेपी के हमलों से बचाने और बीजेपी के विभाजनकारी और विनाशकारी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक एजेंडे को हराने में एक साथ हैं।”
कांग्रेस प्रवक्ता ने शरद पवार की पार्टी को “19 समान विचारधारा वाले दलों” की सूची से बाहर कर दिया। जो अदाणी-हिंडनबर्ग विवाद की जेपीसी जांच चाहते हैं, लेकिन एनसीपी को पार्टियों की सूची में शामिल किया, “20 समान विचारधारा वाले दल है” जो कि राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी से लड़ना जारी रखेगी। जबकि NCP के प्रमुख शरद पवार ने स्पष्ट रूप से कहा कि, वह हिंडनबर्ग रिपोर्ट की जेपीसी जांच की एकतरफा मांग पर अपने सहयोगी कांग्रेस के विचारों से सहमत नहीं हैं। पवार ने कहा कि, इस तरह के बयान (अदाणी समूह और पीएम मोदी पर) पहले भी अन्य व्यक्तियों द्वारा दिए गए थे और कुछ दिनों तक संसद में हंगामा हुआ था, लेकिन इस बार इस मुद्दे को अनुपात से ज्यादा महत्व दिया गया।
