हिमाचल रोडवेज की पहली महिला बस ड्राइवर हैं सीमा ठाकुर

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    first woman bus driver

    वैसे तो पहाड़ी इलाकों पर आपने पुरुषों को ही बस चलाते हुए देखा होगा, लेकिन पहली बार इसे बदला है हिमाचल की सीमा ठाकुर ने, जिनपर न सिर्फ हिमाचल प्रदेश को बल्कि हम सभी को गर्व है। सोलन के अर्की की सीमा ने अपने शौक को जुनून में बदल दिया और आज इसी कारण उन्हें लोग जानते हैं। इससे पहले तक सीमा ठाकुर शिमला सोलन के बीच चलने वाली इलेक्ट्रिकल बस चलाती रही हैं। उनका सफर उन्हीं की तरह शानदार रहा है, आइए आज आप और हम उनके बारे में विस्तार से जानें।

    पिता से मिली प्रेरणा

    सीमा के पिता बलिराम ठाकुर भी एचआरटीसी में बस ड्राइवर थे। वह अक्सर लंबे रूट पर जाया करते थे और कई बार सीमा को साथ ले जाते थे।एक इंटरव्यू में सीमा ने बताया की बस ड्राइवर बनने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से ही मिली। सीमा ने बस ड्राइवर बनने का अपना सपना पूरा करने के लिए सबसे पहले हैवी व्हीकल लाइसेंस बनवाया। इसके बाद, एचआरटीसी में चालकों की भर्ती निकली, तो उन्होंने भी आवेदन कर दिया। सीमा ने बताया कि 121 पदों पर भर्ती थी, लेकिन आवेदन करने वाली वह अकेली महिला थीं। ड्राइविंग टेस्ट पास करने के बाद, साल 2016 में उन्हें एचआरटीसी में नियुक्ति मिल गई थी। शिमला में उन्हें निगम की टैक्सी चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद, उन्होंने शिमला-सोलन के बीच चलने वाली 42 सीटर इलेक्ट्रिक बस भी चलाई।

    कई उपलब्धियों से सम्मानित

    अपनी उपलब्धियों के लिए सीमा को कई सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उन्हें हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी सम्मानित किया था और पूर्व राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय भी उन्हें प्रशंसा पत्र भेजकर उनकी सराहना कर चुके हैं। सीमा मानती हैं कि महिलाएं अकेले सब कुछ करने में सक्षम हैं और वह कभी भी हार मानकर रास्ते से पीछे होने वालों में से नहीं रही हैं। हिमाचल प्रदेश की पहली महिला बस ड्राइवर को हमारा सलाम है।

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