अनूठे है पेड़ पौंधो की आकृति वाले शज़र पत्थर

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उत्तर प्रदेश के बाँदा की केन नदी में ऐसे पत्थर पाये जाते है, जिन्हे देखकर लगता है की कुदरत ने खुद ही इन पत्थरों पर कलाकारी की है। ये खास किस्म के पत्थर है जो शज़र पत्थर के नाम से जाने जाते है। पर्शियन भाषा के शब्द “शज़र” का मतलब होता है – पेड़। अब हम आपको ये बताते है की आखिर ये शजर पत्थर इतने खास क्यों है ? दरअसल शजर पत्थरो को देखने पर ऐसा लगता है की जैसे इन पर किसी कलाकार ने पेड़ – पोंधो की आकृति को उकेर दिया हो।

मानव जाति के लिए प्रकृति का उपहार यह पत्थर बहुत उच्च और रत्नवैज्ञानिक मूल्य वाला एक भूवैज्ञानिक आश्चर्य है। पृथ्वी के ज्वालामुखीय युग में जब सब कुछ तरल और अर्धठोस रूप में था, तरल खनिज (ज्यादातर मैंगनीज और लोहा) सिलिकॉन ऑक्साइड (एगेट) की परतों के भीतर इस तरह जमा हो जाते हैं कि उन्होंने कई प्रकार के पैटर्न बनाए। जैसे झाड़ियाँ, पेड़, जानवर और दृश्य इसे एक विशिष्टता प्रदान करते हैं।

बताते चले की करीब 400 साल पहले अरब से आये लोगो ने इन पत्थरो की खूबियाँ समझी और मुगलों के समय इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई। इस पत्थर के बारे में मिथक हैं कि यह पहनने वाले को शक्ति और मानसिक शक्ति प्रदान करता है और पहनने वाले को मानसिक शक्ति प्रदान करता है और यहां तक ​​कि सभी शक्तिशाली भी उससे प्रसन्न होते हैं; इस्लामिक समुदायों द्वारा इसे एक पवित्र पत्थर के रूप में पूजा जाता है और इसे पहनने वाले लोगों के लिए यह एक अच्छा तावीज़ है।

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