वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2023-24 पेश करेंगी। सरकार मौजूदा मुद्दों से निपटने के लिए नीतियों और कार्यक्रमों में साल भर संशोधन और अद्यतन करती है। केंद्रीय बजट पर सबकी नज़र इसलिए होती है, क्योंकि बज़ट वह दिशा निर्धारित करता है जिसे सरकार अल्पावधि और दीर्घावधि में अपनाती है। उद्योग जगत और लोग केंद्रीय बजट की घोषणाओं का आशा और अपेक्षाओं के साथ इंतजार करते हैं।
केंद्रीय बज़ट में सरकार की घोषणा में कृषि, एमएसएमई, शिक्षा, रक्षा, रेलवे, सामाजिक कल्याण आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए विभिन्न योजनाएं और बज़टीय आवंटन शामिल हैं।
साल 2022 के शुरुआती दिनों को छोड़ के बाकि के साल कोरोना की स्तिथि सामान्य रही जिससे आर्थिक स्थिति वापस से पटरी पर आई| वही महंगाई, गिरता रूपया, बेरोजगारी आदि मुद्दे लोगो के सामने परेशानी बने रहें|
एक नज़र उन मुद्दो पर डालते है जिनका केंद्रीय बजट 2023-24 में सबको रहेगा इंतज़ार:
आय असमानता
ऑक्सफैम इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय आबादी के शीर्ष 10% के पास कुल राष्ट्रीय संपत्ति का 77% हिस्सा है। भारत में 119 अरबपति हैं। इनकी संख्या 2000 में केवल 9 से बढ़कर 2017 में 101 हो गई है। 2018 और 2022 के बीच, भारत में हर दिन 70 नए करोड़पति पैदा होने का अनुमान है। एक दशक में अरबपतियों की संपत्ति लगभग 10 गुना बढ़ गई और उनकी कुल संपत्ति वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत के पूरे केंद्रीय बज़ट से अधिक थी, जो कि 24422 अरब रुपये थी।
कंपनियों के ऊपर लगने वाले टैक्स में लगातार गिरावट आई है| केंद्रीय बजट 2019-20 में नई निर्माण कंपनियों पर लगने वाले टैक्स को सरकार ने 25% से घटा कर 15% कर दिया। वही पुरानी कम्पनियाँ जो सरकार से कोई भी प्रोत्साहन या छूट नहीं लेती, वह 30% की बजाये 22% ही कर देती है| सरकार कंपनियों के हाथ में ज्यादा पैसे इसलिए छोड़ती है ताकि वह उस पैसे को देश में लगाए और आगे लोगों को रोजगार दे| रोजगार तो ज्यादा बढ़ा नहीं पर सरकार ने इस फैसले से होने वाली कर में गिरावट के लिए तेल, कपडे आदि में लगने वाला अप्रत्यक्ष कर बढ़ा दिया| 2023-24 के बजट में सरकार का इस मुद्दे पर रुख अहम रहेगा|
न्यूनतम समर्थन मूल्य:
किसान संघ की मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार कोई कानून बनाये या संविधान पर संसोधन करके इसे किसानों का अधिकार बना दे| पर गेहूँ और चावल पर मिलने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य बाजार मूल्य से ज़्यादा है| इसके कारण लोगों को भारी मात्रा में उत्पाद के बाद भी यह वस्तुएं महंगी मिलती है| किसान भी इनके खेत और भू-जल पर नुक़सान के बाद भी ज़्यादा मिल रहे न्यूनतम समर्थन मूल्य के कारण इनकी खेती करते है और देश को तिलहन, दाल आदि की कमी का सामना करना पड़ता है|
पशु अनाज:
पशु अनाज में थोक महंगाई दर दिसंबर माह में 28.66% हो गया| चारे की कीमतों में वृद्धि महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे दूध उत्पादन की लागत बढ़ जाती है, जो अंततः उपभोक्ताओं के घरेलू बजट को प्रभावित करती है। वर्ष 2022 में अमूल और मदर डेयरी जैसे डेयरी ब्रांड ने अपने दूध के दाम कई बार बढ़ाए। इसके अलावा, चारे की बढ़ती कीमतों ने पशुपालन पर निर्भर परिवारों को भी नुकसान पहुँचाया है। यह देखना दिलचस्प रहेगा कि सरकार इस मुद्दों पर क्या फ़ैसला लेती है|
छटाई:
हाल के दिनों में, आर्थिक स्थिति और मुनाफ़े को मद्देनज़र रखते हुए लोगों का नौकरियों से भारी मात्रा में निकाला जाना आम हो गया है| स्विग्गी, जोमाटो, अमेज़न, ट्विटर आदि ने कई सैकड़ों युवाओ को नौकरी से निकाल दिया है| निकले युवा वापस से बाजार में नौकरियों के लिए घूम रहे है जहाँ पर पहले से ही स्थिति ठीक नहीं हैं| सरकारी विभागों में भी कई रिक्त पद है| रोजगार के लिए सरकार द्वारा बज़ट 2023-24 में लिए गए फ़ैसले काफी अहम होंगे|
तेल की कीमतें:
वर्ष 2022 में लोगों को तेल की कीमतों ने काफ़ी सताया| इसमें खाने का तेल और ईंधन दोनों शामिल है| दोनों का देश में उत्पादन मांग से कम हैं| पहले ईंधन की बात करते है| ईंधन पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है| ईंधन का रेट जब कहीं चुनाव नहीं होते तो लोगों के लिए सरदर्द बन जाता है| लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी थोड़ी कम की थी| अब सरकार रूस से सस्ते दाम में ज़्यादा ईंधन ले रही है| इसका फ़ायदा लोगों तक कब पहुंचेगा, यह देखने वाली बात है| साल के अंत में मिजोरम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में चुनाव है| बज़ट में सरकार ईंधन के दाम के लिए क्या फ़ैसला लेती है यह भी महत्वपूर्ण रहेगा|
वही खाने वाले तेल की बात करे तो वह ईंधन से कम नहीं था| रूस और यूक्रेन के युद्ध के बाद वह लगातार बढ़ता जा रहा हैं| देश में तिलहन का उत्पादन मांग से कम है| सरकार की अब तक की तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने की योजनाएँ उपेक्षित परिणाम देने में विफल रहीं| आनुवंशिक रूप से संशोधित सरसों पर भी सरकार का फैसला बाकि है|
सरकार का बजट सत्र में इन मुद्दों पर फ़ैसला आने वाले सालों के लिए दिशा निर्देश तय करेगा| देखना यह है कि यह फ़ैसले लोगों के हित को कितना ध्यान में रख कर लिए जाते है|
















