Homeन्यूज़क्राइमआबकारी नीति मामले में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को पुलिस ने किया गिरफ्तार

आबकारी नीति मामले में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को पुलिस ने किया गिरफ्तार

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) आबकारी नीति मामले (Excise Policy Case) में सीबीआई की पूछताछ से पहले रविवार को राजघाट पहुंचे थे। यहां पर उपमुख़्यमंत्री बापू को नमन किया और घंटो तक यही बैठे रहे। इसके बाद मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) रविवार की सुबह 11 बजे सीबीआई दफ्तर पहुंचे। यहां पर उपमुख्यमंत्री से करीब आठ घंटे पूछताछ की गई। जिसके बाद उन्हें पुलिस के द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

उपमुख्यमंत्री से इन मुद्दों पर सीबीआई ने किये सवाल

सीबीआई ने पाया था कि, “साउथ लॉबी” के कहने पर नई आबकारी नीति में शराब के थोक विक्रेताओं के लाभ मार्जिन की सीमा को पांच पर्सेंट से बढ़ाकर बारह पर्सेंट कर दिया गया था। ‘साउथ लॉबी’ राजनेताओं और शराब व्यवसावियों का एक ग्रुप है। जिसने कथित तौर पर नीति को अपने पक्ष में करा लिया है।

यह भी आरोप लगाया गया है कि, मंत्रियों के एक समूह ने लाभ मार्जिन का पांच प्रतिशत तक सीमित करने की बात कही थी। वही यह भी आरोप है कि विशेषज्ञ समिति के समर्थन में मंत्रिपरिषद के लिए पहले के एक नोट को छिपाकर सुनियोजित तरीके से मंत्री समूह का गठन कर आबकारी नीति (Excise Policy) पर विशेषज्ञ समिति की एक रिपोर्ट को पूरी तरह से बदल दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि, मनीष सिसोदिया से इन मुद्दों से जुड़े सवाल किए गए जिनके जवाब वे टाल गए।

निजी हाथों की जगह सरकारी निगमों को शराब बिक्री करने की इजाजत दे दी गई

आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के दिल्ली में सत्तारूढ़ होने के आठ साल के दौरान उपमुख़्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia)के समेत तीन की मंत्रिपद पर रहते हुए गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे पहले सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) और जितेंद्र तोमर (Jitendra Tomar) भी गिरफ्तार हो चुके हैं।

बता दे कि, केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation) ने 2021-22 की नई आबकारी नीति लागू करने के मामले में कथित भ्रष्टाचार को लेकर दिल्ली के उपमुख़्यमंत्री मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया है। जहाँ सबूत मिटाने, खातों में हेरफेर, भ्रष्टाचार, अनुचित लाभ देने और लेने का आरोप लगाया गया है।

मामले में जब भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो दिल्ली सरकार ने अपनी नई नीति को ही वापस ले लिया और फिर से निजी हाथों की जगह सरकारी निगमों को शराब बिक्री करने की इजाजत दे दी गई।

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